पटमदा में पत्थर खनन के विरोध में ग्रामीणों का उग्र प्रदर्शन, डीसी कार्यालय पहुंचकर कार्रवाई की मांग

पटमदा में पत्थर खनन के विरोध में डीसी कार्यालय पहुंचे प्रदर्शनकारी ग्रामीण

जमशेदपुर: पूर्वी सिंहभूम जिले के पटमदा पत्थर खनन को लेकर मंगलवार को सैकड़ों ग्रामीण जिला मुख्यालय पहुंचे और जिला उपायुक्त (डीसी) कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने कथित अवैध एवं अनियंत्रित पत्थर खनन, क्रशर संचालन और ग्रामसभा की अनुमति के बिना चल रहे खनन पर रोक लगाने की मांग की। आंदोलन का नेतृत्व पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन की पुत्री दुखनी सोरेन ने किया।

📌 मुख्य बातें

  • पटमदा में पत्थर खनन के विरोध में सैकड़ों ग्रामीणों का प्रदर्शन।
  • डीसी कार्यालय पहुंचकर खनन और क्रशर संचालन बंद कराने की मांग।
  • ग्रामसभा की अनुमति के बिना खनन का आरोप।
  • पर्यावरण, खेती और लोगों के स्वास्थ्य पर असर का दावा।
  • कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी।

डीसी कार्यालय परिसर में लगे विरोध के नारे

प्रदर्शन के दौरान “खनन बंद करो”, “क्रशर भगाओ, फेफड़े और खेत बचाओ”, “हमारा गांव, हमारा राज” और “ना लोकसभा, ना विधानसभा, सबसे बड़ा ग्रामसभा” जैसे नारों से पूरा डीसी कार्यालय परिसर गूंज उठा। बड़ी संख्या में आदिवासी महिला-पुरुष पारंपरिक वेशभूषा और पारंपरिक हथियारों के साथ जुलूस के रूप में पहुंचे।

निर्धारित क्षेत्र से अधिक खनन का आरोप

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पटमदा के ओड़िया मौजा स्थित लायाडीह, चिरूडीह और ओड़िया टोला में करीब 20 वर्षों से बड़े पैमाने पर पत्थर खनन किया जा रहा है। उनका कहना है कि खाता संख्या 624 के प्लॉट संख्या 4546 (10 एकड़) और प्लॉट संख्या 988 (8 एकड़) के लिए स्वीकृति होने के बावजूद निर्धारित सीमा से अधिक क्षेत्र में खनन किया जा रहा है, जिससे पर्यावरण और ग्रामीण जीवन प्रभावित हो रहा है।

स्कूल, घर और बिजली लाइन के बीच खनन पर चिंता

ग्रामीणों के अनुसार खदान के आसपास स्कूल, आवासीय मकान और धार्मिक स्थल स्थित हैं। वहीं गांव के बीच से 11 हजार वोल्ट की बिजली लाइन भी गुजरती है। उनका कहना है कि खनन के दौरान होने वाले विस्फोट किसी बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि खनन शुरू करने से पहले ग्रामसभा की अनुमति नहीं ली गई।

धूल और प्रदूषण से स्वास्थ्य पर असर का दावा

ग्रामीण अपने साथ एक लंगड़ी भेड़ भी लेकर पहुंचे। उनका दावा था कि पत्थर क्रशर से उड़ने वाली धूल और प्रदूषण का असर केवल लोगों पर ही नहीं बल्कि पशुओं पर भी पड़ रहा है। उनका आरोप है कि क्षेत्र में दिव्यांग मवेशियों के जन्म के मामले बढ़ रहे हैं तथा बच्चों और बुजुर्गों में श्वसन संबंधी बीमारियों का खतरा भी बढ़ा है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

प्रशासन को सौंपा ज्ञापन

प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के लिए डीसी कार्यालय परिसर के बाहर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। प्रतिनिधिमंडल ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर तत्काल पत्थर खनन और क्रशर संचालन पर रोक लगाने, निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।

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