जमशेदपुर न्यूज़: उप्र संघ और एमएनपीएस विवाद में संस्थापक ने मांगी निष्पक्ष जांच

उप्र संघ विवाद पर बयान देते संस्थापक महासचिव डॉ. डी.पी. शुक्ला

जमशेदपुर: उप्र संघ के संस्थापक महासचिव एवं मोतीलाल नेहरू पब्लिक स्कूल के संस्थापक डॉ. डी.पी. शुक्ला ने उप्र संघ और मोतीलाल नेहरू पब्लिक स्कूल से जुड़े विवाद की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि संघ की वर्तमान कार्यकारिणी का कार्यकाल 31 मार्च 2026 को समाप्त हो चुका है। इसके बावजूद संविधान के विपरीत निर्णय लिए जा रहे हैं।

डॉ. शुक्ला ने कहा कि उप्र संघ के पंजीकृत संविधान में कार्यकाल बढ़ाने का कोई प्रावधान नहीं है। इसके बावजूद अध्यक्ष द्वारा मनमाने तरीके से कार्यकाल बढ़ाया गया, जो पूरी तरह असंवैधानिक है।

कार्यकाल विस्तार और निष्कासन पर उठाए सवाल

डॉ. शुक्ला ने कहा कि वर्तमान कार्यकारिणी वैधानिक अधिकारों के बिना कार्य कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जून 2026 में उन्हें महासचिव पद से हटाने की कार्रवाई भी इसी आधार पर की गई।

उनका कहना है कि उप्र संघ के संविधान के अनुसार वर्तमान कार्यकारिणी को निर्वाचित पदाधिकारियों को निष्कासित करने का अधिकार नहीं है। इसलिए यह कार्रवाई अवैध और असंवैधानिक है।

गौरी गांव की जमीन को लेकर भी लगाए आरोप

उन्होंने वर्ष 2020 में सरायकेला के गौरी गांव में खरीदी गई जमीन को लेकर लगाए जा रहे आरोपों का भी खंडन किया। उनके अनुसार यह जमीन संघ के संविधान और तत्कालीन कार्यकारिणी के निर्णय के अनुरूप खरीदी गई थी।

उन्होंने आरोप लगाया कि बाद में गठित जांच समिति की रिपोर्ट पक्षपातपूर्ण थी और तथ्यों के विपरीत तैयार की गई। डॉ. शुक्ला ने यह भी दावा किया कि कुछ लोग इस जमीन को बेचने की साजिश रच रहे हैं, जबकि इसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों के लिए निःशुल्क एवं गुणवत्तापूर्ण विद्यालय की स्थापना करना था।

स्वतंत्र जांच की मांग

डॉ. शुक्ला ने पूरे मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कर उप्र संघ के संविधान के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।

नोट: यह समाचार डॉ. डी.पी. शुक्ला द्वारा लगाए गए आरोपों और उनके बयान पर आधारित है। संबंधित पक्ष का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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