रांची न्यूज़: रिम्स विवाद में मेडॉल-हेल्थ मैप भुगतान पर सरयू राय का बड़ा आरोप, सीएम से उच्चस्तरीय जांच की मांग

रिम्स विवाद में मेडॉल-हेल्थ मैप भुगतान को लेकर सरयू राय ने जांच की मांग की।

रांची/जमशेदपुर: जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने रिम्स के पूर्व निदेशक डॉ. राजकुमार के इस्तीफे और उनकी कथित “अपमानजनक विदाई” को लेकर झारखंड सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि विवाद की जड़ मेडॉल और हेल्थ मैप नामक निजी जांच एजेंसियों के बकाया भुगतान का मामला है। सरयू राय ने मुख्यमंत्री से पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

डॉ. कामेश्वर प्रसाद ने भुगतान से किया था इनकार

एक बयान जारी करते हुए सरयू राय ने कहा कि रिम्स में पैथोलॉजिकल एवं माइक्रोबायोलॉजिकल जांच के लिए नियुक्त निजी एजेंसियों मेडॉल और हेल्थ मैप ने लगभग 100 करोड़ रुपये का बिल प्रस्तुत किया था। उनका आरोप है कि रिम्स के तत्कालीन निदेशक डॉ. कामेश्वर प्रसाद ने इस बिल में बड़े पैमाने पर अनियमितता और फर्जीवाड़े की आशंका जताते हुए भुगतान से इनकार कर दिया था।

डॉ. राजकुमार पर भी भुगतान का दबाव डालने का आरोप

सरयू राय ने कहा कि डॉ. कामेश्वर प्रसाद के बाद निदेशक बने डॉ. राजकुमार पर भी स्वास्थ्य विभाग की ओर से उक्त भुगतान करने का दबाव बनाया गया। हालांकि, उन्होंने यह कहते हुए भुगतान से इनकार कर दिया कि यदि एजेंसियों की नियुक्ति स्वास्थ्य विभाग ने की है, तो भुगतान भी विभाग करे अथवा लिखित आदेश देकर आवश्यक राशि रिम्स को उपलब्ध कराए। राय का आरोप है कि विभाग इसके लिए तैयार नहीं हुआ और यहीं से निदेशक तथा स्वास्थ्य विभाग के बीच विवाद गहरा गया।

‘रिम्स की स्वायत्तता में दखल’

सरयू राय ने कहा कि राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) एक स्वायत्तशासी संस्था है, जिसका संचालन रिम्स अधिनियम एवं रिम्स नियमावली-2002 के तहत शासी परिषद द्वारा किया जाता है। उनका आरोप है कि राज्य सरकार लगातार रिम्स के प्रशासनिक एवं वित्तीय मामलों में हस्तक्षेप करती रही है, जिससे संस्थान की स्वायत्तता प्रभावित हुई है।

बन्ना गुप्ता के कार्यकाल पर उठाए सवाल

सरयू राय ने आरोप लगाया कि मेडॉल और हेल्थ मैप की नियुक्ति तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता के कार्यकाल में की गई थी और इस दौरान रिम्स प्रबंधन से आवश्यक सलाह नहीं ली गई। उन्होंने सरकार से स्पष्ट करने को कहा कि इन एजेंसियों की नियुक्ति किन नियमों और प्रक्रियाओं के तहत की गई तथा इसका उद्देश्य क्या था।

बकाया राशि को लेकर भी सवाल

राय ने दावा किया कि वर्तमान में मेडॉल और हेल्थ मैप पर रिम्स का लगभग 38 करोड़ रुपये बकाया है, जबकि दोनों एजेंसियां जांच सेवाओं के एवज में करीब 15 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि की मांग कर रही हैं। उनके अनुसार, कुल मिलाकर लगभग 53 करोड़ रुपये की देनदारी रिम्स पर डाली जा रही है, जिसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

तीन पूर्व निदेशकों के मामले की जांच की मांग

सरयू राय ने मुख्यमंत्री से मांग की कि रिम्स के तीन पूर्व निदेशकों—डॉ. डी.के. सिंह, डॉ. कामेश्वर प्रसाद और डॉ. राजकुमार—को किन परिस्थितियों में पद छोड़ने के लिए विवश होना पड़ा, इसकी निष्पक्ष जांच कराई जाए। उन्होंने पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता, तत्कालीन अधिकारियों तथा इस पूरे प्रकरण से जुड़े अन्य जिम्मेदार लोगों की भूमिका की भी जांच कराने की मांग की।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि डॉ. राजकुमार पर अनुचित निर्णय लेने का दबाव बनाया गया, जिसके कारण उन्हें अपने कार्यकाल के दौरान तीन बार झारखंड उच्च न्यायालय से राहत लेनी पड़ी। साथ ही उन्होंने शासी निकाय की बैठक बुलाए बिना सदस्यों के हस्ताक्षर लेकर उन्हें हटाने की कथित कोशिश की भी जांच कराने की मांग की।

सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार

फिलहाल सरयू राय के इन आरोपों पर राज्य सरकार, स्वास्थ्य विभाग या संबंधित एजेंसियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि सरकार या संबंधित पक्ष की ओर से कोई स्पष्टीकरण जारी किया जाता है, तो उसे भी समाचार में प्रमुखता से शामिल किया जाएगा।

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